Hindi Bhavan

 

          बेलगाँव जिलेभर में हिन्दी का प्रचार और प्रसार करनेवाली यह एकमेव स्वतंत्र संस्था है।कार्यकर्ताओं का निस्वार्थ योगदान ओर जनता की उदर सहायातासे सरकरसे किसी प्रकार की आर्थिक मदद लिये बिना हिन्दी का प्रचार करनेवाली  यह एकमेव संस्था है। द. भा. हिंदी प्रचार समिति, वर्धा महाराष्ट्र रा.भा.सभा, पुणे, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग, आदि संस्थाओं द्वारा चलाये जानेवाली हिन्दी परीक्षाओं के लिए अबतक इस संस्थाने लगभग दो लाख छात्रों को पढ़ाने का कार्य किया है।

        स्वातंत्र्य पूर्व कालखंड में इस संस्था के कार्य बेलगाँव के  नूतन महाविद्यालय तथा महिला विद्यालय  में  chlta था । उसके बाद हिन्दी प्रचारसभा का कार्यालय किर्लोस्कर रोड पर के एक किराये के मकान में शुरू  किया गया। इसी प्रकार शहापूर, टीलकवाडी, येल्लुर में भी हिन्दी. प्रचार  सभा का कार्य चलता था। इन विभागों में हिन्दी प्रचारका कार्य स्व.सुमित्राबाई सोहनी, विनायकराव कर्गुप्पीकर, वसंतराव भाद्री, केशवराव कुलकर्णी तथा स्व. लक्ष्मणराव पाटील (yellur) इन्हों ने सम्हाला था। इन vibhagonki   पाठशाला हायस्कूल में पढ़ाई का कार्य चलता था। 

           हिन्दी भवन निर्माण

    हिन्दी प्रचार का कार्य व्यापक होने के कारण एक निजी भवन की आवश्यकता महसूस होने लगी। सभा के संस्थापक सदस्य स्व. कु.रा. परांजपे, रा.के. नाडगौडा, भैरूलाल व्यास, भा. वि. पुणेकर तथा स्व गोविंद रे. अम्मणगी इन के परिश्रम से निजी भवन बनाने का कार्य शुरु हुआ। इन पाँच सदस्यों में स्व भेरुलाल व्यास अत्यंत सक्रीय सामाजिक कार्यकर्ता में। उन्हीं के अथक परिश्रम से हिन्दी भवन निर्माण के कार्य ने जोर पकड़ा। वे ही इस के आधार स्तंभ थे। संस्था के कानूनी सलाहकार स्व दादासाहेब गळतगेकर (नाईक) वकील की सलाहपर स्व.भैरुलाल  व्यासजी ने  khadebazarme एक जमीन 3300रुपयों में broughtखरीदी। इस कार्य के लिए एक समिति का गठन हुआ। तत्कालिन बेलगाँव शहर के प्रसिद्ध इंजिनियर गजाननराव देशपांडेजी ने बिना किसी गौरवधन लिए इस इमारत को बांधने के कार्य में बहुमूल्य सहयोग दिया। इस भवन को बनाने के लिए रा.भा.प्र.स. वर्धा, अर्बन को-आप बैंक, गार्डनर्स को-आप, सोसाइटी, स्व. पी. आर. नाईक (खान उद्योजक) तथा बेलगाँव के व्यापारी बंधु और नागरिकों के उदार सहयोग से निधि इकट्ठा की गई। १९५९ में हिन्दी भवन की नीव डाली गई। १९६१ दशहरे के घट स्थापना के दिन इस इमारत में हिन्दी प्रचार सभा का कार्य शुरू हुआ।

             नया हिन्दी भवन

     राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजीने १९३६ में हिन्दी के प्राचार और प्रसार तथा राष्ट्रभावना निर्माण करने हेतु एवं राष्ट्रको एकसंघ रखने के हेतु राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की स्थापना वर्धा (महाराष्ट्र) में की। पूरे भारत में हिन्दी के प्रचार कार्य जोरोंसे होने लगा। बेलगांव में इस राष्ट्रीय कार्य की शुरूवात स्व.कृ.रा. परांजपे, स्व.रा.के. नाडगौडा, स्व. भेरूलाल व्यास, स्व. भा. वि. पूणेकर, स्व. गो. रे. अम्मणगी और स्व. द.पां. साटमजी जैसे हिन्दी के प्रचारकों द्वारा हुई।

     हिन्दी के इस राष्ट्रीय कार्य को चलाने के लिए एवं हिन्दी वर्ग पढाने के लिए हिन्दी प्रचार सभा, बेलगाँव को जगह तथा एक वास्तु की आवश्यकता महसूस हुई। इस दिशामें स्व. श्री. भैरूलाल व्यासजी के अथक परिश्रमसे शहर के मध्यभाग में (खडेबजार, बेलगाम) हिन्दी प्रचार सभा को अपना कार्य चलाने के लिए एक उपयुक्त जगह मिल गई और इसी जगहपर हिन्दी प्रचार सभा, बेलगाम की वर्तमान वास्तु स्थित है।

      स्व. स‌भाऊ परांजपे, स्व. मोहनराव पोतदार, स्व. द.पां. साटमजी, श्री. शरदराय बावडेकरजी और हिन्दी प्रेमियोंक प्रयत्नसे प्राप्त हुआी भवन से संलग्न की खुली जगहपर विस्तारित हिन्दी भवन का निर्माण करने का संकल्प किया गया। सन २००२-२००३ में हिन्दी प्रचार सभा, बेलगाँव का सुवर्ण महोत्सव मनाया गया। इसी समय विस्तारित भवन के निर्माण के लिए श्री. शरदराव बावडेकर, स्व. मोहनराव पोतदार और उनके सुपुत्र श्री. अनिल पोतदारजी के प्रयत्नो से महानगरपालिकासे भवन निर्माण करने के लिए आवश्यक अनुमति मिल गयी।

     स्व. मोहनराव पोतदारजी के दुःखद निधन के उपरान्त श्री. शरदराव बावडेकर जो सभा के उपाध्यक्ष थे उन्होंने सभा के अध्यक्षपदका कार्यभार स्वीकार किया। उनकी प्रेरणा, प्रोत्साहन एवं सक्रिय सहभाग भवन निर्माण का कार्य आगे शुरु हुआ। उन्होंने इस कार्य के लिए धन सहाय तो दिया ही है, पर भवन निर्माण के हर कार्य में अपना अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने अपना तन-मन-धन अर्पण किया है। उनके सक्रिय सहभाग और मार्गदर्शन से भवन-निर्माण में कठनाईयाँ नहीं आयीं।

     सभा के प्रधानमंत्री श्री. अप्पासाहेब गंधाडेजी में कार्यकर्ताओंकी बैठक का आयोजन जनवरी २००४ में किया। इस बैठकमें नया भवन बनवाने के कार्य को गति देने का निर्णय लिया गया। अतः एक भवन निर्माण समिति का गठन किया गया। इसमें कार्यकारिणी के निम्न लिखित सदस्यों का बवन किया गया।

श्री। शरदराव बावडेकर – अध्यक्ष 

श्री. अप्पासाहेब गंधाडे – सचिव 

श्री. ग. मे. देवरकर – सदस्य 

श्री. कृ. गु. दीक्षित- सदस्य 

श्री. पांडुरंग सातम -सदस्य 

श्री. आनंद पाटिल-इंजीनियर-सदस्य 

     भवन निर्माण के इस कार्य के लिए धनराशी  करने का कार्य बहुत पहले से शुरू किया गया था। किन्तु अब तक जमा की धनराशी इस कार्य के लिए पर्याप्त नहीं थी। अतः भवन निर्माण के लिए धनराशी जमा करने हेतु शहर के दानी व्यक्तियों से मिलने सभा के कार्यकर्ता गए। हमारे इस प्रयास में श्री. प्रभाकर पाटीलजी (पेंटसन एजन्सीज, बेलगाँव के संचालक) ने तुरंत अपनी ओरसे धनराशी दान स्वरूप दे दी। उनकी इस उदार मदद से हम सब प्रभावित हुए और भवन निर्माण ने गति ली। हमारे अध्यक्ष श्री. बावडेकरजी बहुतही मिलनसार हैं और उनके सक्रिय सहकार्यसे हमें शहरके अन्य दानी व्यक्तियोंसे उदार सहायता मिली। जिनमे श्री. बाबासाहेब जिनराळकर श्री. चन्द्रकान्त हेरेकर, श्री. सुहास चंदगडकर, सौ. मंगला गोगटे, श्री. शंकरराव पाटील आदिने आर्थिक सहायता की। हमारे संस्था के उपाध्यक्ष श्री. सुरेश हूंदरेजीने इस कार्य के लिए आर्थिक सहाय्य दिया। श्री. शामराव दोरगुडेजी जो हमारे सक्रिय कार्यकर्ता हैं उन्होंने इस कार्य के लिए उदार सहायता दी।

    इन सबसे आर्थिक सहायता प्राप्त हुई और गुरुवार दि. २२-०४-२००४ को इस नए भवन की खुली जगहपर भूमि पूजन का आयोजन किया गया। यह कार्य सभा के अध्यक्ष श्री. शरदराव बावडेकरजी तथा उनकी पत्नी कै. सौ. उषाताई के हाथों संपन्न हुआ। दि. २५-०४-२००४ को लेआऊट बनाया गया, जिसमें सभाके मानद इंजिनीयर श्री. आनंद पाटीलजी का मार्गदर्शन मिला और भवन निर्माण के कार्य की शुरुवात हुई। दि. १८-०५-२००४ को स्व. बाबासाहेब जिनराळकर और स्व. चन्द्रकान्त हेरेकरजी के करकमलों द्वारा भवन के स्तंभ (कॉलम) खड़े करने का कार्यक्रम किया गया। दि. १८-०१-२००५ को श्री. शंकरराव पाटील और श्रीमती मंगला गोगटे इन्होने भवन के स्लॅब चढ़ाने के कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्शायी और भवन निर्माण कार्य के लिए प्रोत्साहित किया।

      भवन निर्माण के इस कार्य में हमें बेलगाँव शहरके प्रसिद्ध वास्तु रचनाकार श्री. बकुल जोशीजी की बहुमूल्य सेवाएँ मिली है। नूतन भवन के निर्माण का नक्शा और आसकी रखना उन्होंनेही विनामूल्ला बनाई है। भवन निर्माण के दरमियान उनका मार्गदर्शन हम सबको प्रोस्ताहित करता रहा है। श्री. बकुल जोशीजी के अनुरोधपर श्री. डी. एल. कुलकर्णी (स्ट्रक्चरल इंजीनियर) ने इस भवन का स्ट्रक्चरल नक्शा बनाया और भवन की मजबूती के लिए अपने सुझाव दिये। श्री. जोशीजी के ही सहायक इंजिनीयर श्री. संजय कंग्राळकरजी ने भवन निर्माण के हर पायदान पर और समय समय पर मार्गदर्शन दिया। श्री. राजाराम पाटील, (येळ्ळूर) और श्री. गणपत पाटील, (खानापूर) इन दोनों ठेकेदारोंने भवन निर्माण का कार्य अत्यंत कुशलता से किया। दि. १७-०८- २००५ को इस नए भवनकी वास्तुशांति का कार्यक्रम श्री. सुनिल पोतदार और उनकी पत्नी सौ. मीना पोतदार द्वारा सभा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, दानी व्यक्ति एवं हिन्दी प्रेमियोंकी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

     सदन के पूर्व अध्यक्ष स्व. मोहनराव पोतदार, वर्तमान अध्यक्ष श्री. शरदराव बावडेकरजी की पदोन्नति, श्री. प्रभाकर पाटिल, श्री. नरहर पाटणकर, श्री. सुरेश हुंदारे, श्री. शामराव दोरगुडे, श्री. सुधीर दरेकर, डाॅ. नितिन खोत, श्री. सुधाकर देशपांडे, श्री. नागेश सरदेसाई, श्रीमती शशि संगम पाटिल, श्री. अप्पासाहेब गंधाडे, श्री. एन.वाई. बालेकुंद्री, श्री. कृ. गु. दीक्षित एवं अन्य समाजसेवियों के उदार सहयोग से, हिन्दी प्रेमियों के आशीर्वाद से, सभा कार्यकर्ताओं की आर्थिक एवं सक्रिय भागीदारी से यह निर्माण कार्य आसान हो गया है। इस कार्य में राभा के कार्यकारी अध्यक्ष श्री. सी. एम. देवारकर, श्री. अ.ल .गंधाडे, श्री. कृ. गु. दीक्षित, श्री. विट्ठल बाड्रसकर एवं कार्यकारिणी समिति के अन्य सदस्यों का योगदान महत्वपूर्ण है।

इस प्रकार हमारा नया हिन्दी भवन पूर्ण हुआ।